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तराबीह मुक्म्मल होने के बाद मुल्क में वबा के खात्मे,खुशहाली की दुआ हुई

 

कानपुर, रमज़ान का चांद निकलते ही उसी रात से तराबीह (विशेष नमाज़) शुरू होती है। अल्लाह की मुकद्दस किताब कुरआन शरीफ रमज़ान में नाज़िल हुई थी। ईशा की नमाज़ के बाद 20 रकआत तराबीह की नमाज़ अदा होती है। जिसे रमज़ान में अदा की जाती है। पूरे रमज़ान चलने वाली तराबीह में हाफिज़ पूरा कुरआन शरीफ सुनाते हैं लेकिन इस बार कोरोना वायरस वबा की वज़ह से शासन प्रशासन का धर्म स्थलों में 05 लोग से ज़्यादा प्रवेश करने की अनुमति नही थी तो मस्जिद के पेश इमामों व ज़िम्मेदार ही जा सकते थे। इसलिए तराबीह मस्जिद में हुई लेकिन उसमे चंद लोग ही शामिल हुई घड़ी वाली मस्जिद के पेश इमाम हाफिज़ माज़ हसन सलामी ने कुरआन पाक के 30 पारे सुनाए। शुक्रवार की रात तरावीह मुकम्मल होने के बाद दुआ हुई जिसमें अल्लाह से रमज़ानुल मुबारक महीने की बरकत से मुल्क से खौफनाक वबा के खात्मे व खुशहाली की दुआ की।
तराबीह में शामिल होने वालों में हाफिज़ माज़ हसन सलामी, हाफिज़ शोएब आलम, मोहम्मद शाज़ेब, एजाज़ रशीद मौजूद थे।

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