ग्लोबल फैटी लिवर पर केएमसी ने जागरूकता कार्यक्रम का किया आयोजन
फैटी लिवर होने पर उसे हल्के में न ले मरीज, शराब जीवन-शैली व अत्याधिक शराब का सेवन लिवर को कर सकता है बीमार
कानपुर-ग्लोबल फैटी लिवर के अवसर पर फैटी लिवर के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन केएमसी (कानपुर मेडिकल सेंटर) में किया गया कार्यक्रम में डॉक्टरो ने फैटी लिवर रोग के जोखिम रोकथाम और प्रबंधन के बारे में लोगो को बताया डॉ गौरव चावला (एमडभ् मेडिसन, डीएम गैस्ट्रोएंटरोलॉजी) ने बताया कि फैटी लिवर रोग तब होता है जब लिवर कोशिकाओ में अतिरिक्त वसा जमा हो जाती है इसे हम मोटे तौर पर दो प्रकारो से वर्गीकृत करते है पहला मेटाबोलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डीसीज (एमएएसएलडी) और दूसरा अल्कोहलिक फैटी लिवर डीसीज (एएफएलडी) है जबकि (एमएएसएलडी) से (एएफएलडी) काफी आम है अक्सर मोटापे, मघुमेह और मेटाबोलिक सिंड्रोम से जुडा होता है जबकि (एएफएलडी) अत्याधिक शराब सेवन से जुडा होता है कार्यक्रम के दौरान डॉ गौरव चावला ने बताया कि फैटी लिवर रोग वैश्विक आबादी के लगभग 33 प्रतिशत लोगो को प्रभावित करता है। बढ़ते मोटापे की दर और गतिहीन जीवन शैली के कारण इसका प्रचलन अब तेजी से बढ़ रहा है जो कि प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है मोटापा, टाइप टू मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, हाई बीपी, खराब और संबंधी शारीरिक निष्क्रियता है अगर इसका समय पर इलाज न कर जाए तो फैटी लिवर रोग और भी गंभीर स्थितियों में बदल सकता है जैसे कि लीवर में हेपेटाइटिस, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक की लिवर कैंसर भी इन जटिलताओं को रोकने के लिए शुरुआती पहल और जीवन-शैली में बदलाव बहुत जरूरी है इसे बचाव के लिए स्वस्थ आहार जैसे फलों सब्जियों साबूदाना और तीन प्रोटीन से भरपूर संतुलित आहार पर जोर दें प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाले व्यायाम करें जैसे पैदल चलना, साइकिल चलाना व तैरना आदि है शरीर का स्वस्थ वजन रखें नियमित चिकित्सा जांच और लिवर फंक्शन फैटी की जांच जरूर कराते रहे ताकि लिवर रोग की शुरुआती पता लगाने पर मदद मिल सके (एएफएलडी) लिवर जोखिम को कम करने के लिए शराब का सेवन कम करें या बिल्कुल बंद कर दे!


















