कानपुर शहर के जाजमऊ थाना क्षेत्र स्थित नई चुंगी चौराहा इन दिनों ई-रिक्शा चालकों की अराजकता और ट्रैफिक पुलिस की मनमानी का केंद्र बन गया है। चौराहे के चारों ओर अवैध रूप से खड़े ई-रिक्शा और ऑटो न केवल भीषण जाम का कारण बन रहे हैं, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों पर भी भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक मीडिया टीम ने मौके पर पहुंचकर रियल्टी चेक किया, जिसके बाद ट्रैफिक पुलिसकर्मी बौखला गए और मीडियाकर्मियों से ही उलझ पड़े।
रियल्टी चेक के दौरान यह बात सामने आई कि नई चुंगी चौराहे पर कानून व्यवस्था केवल आम वाहन चालकों के लिए है। ई-रिक्शा और ऑटो चालक बेखौफ होकर सड़क घेरकर सवारियां भरते हैं, जिससे राहगीरों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। जब इस अराजकता के पीछे की वजह जानने की कोशिश की गई, तो एक ई-रिक्शा चालक ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि यहां बिना किसी रोक-टोक के सवारी भरने के एवज में प्रत्येक चालक को ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को ₹300 प्रति माह का ‘सुविधा शुल्क’ देना पड़ता है। यह शुल्क एक तरह से अवैध संचालन का लाइसेंस बन चुका है।
इसी दौरान मौके पर मौजूद एक मोटरसाइकिल सवार युवक ने ट्रैफिक पुलिस की वसूली का एक और उदाहरण पेश किया। युवक ने बताया कि उसकी गाड़ी में प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं था, जिसके लिए ट्रैफिक पुलिस ने उसे भारी-भरकम चालान का डर दिखाया और अंत में मामला रफा-दफा करने के नाम पर उससे ₹1000 वसूल लिए।
जब मीडिया टीम ने ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से इस अव्यवस्था पर सवाल करना चाहा, तो एक चौंकाने वाला दृश्य देखने को मिला। चौराहे के किनारे जालियों के पीछे बनी क्यारी में कुछ पुलिसकर्मी आराम से खड़े हुए किसी तरह की ‘डील’ में व्यस्त थे। जब उनसे चौराहे पर लगे अवैध स्टैंड को हटाने के बारे में पूछा गया, तो वे भड़क उठे और एक पुलिसकर्मी ने मीडिया टीम के साथ अभद्रता करनी शुरू कर दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी शिकायत डीसीपी ट्रैफिक रवीन्द्र कुमार से की गई। उन्होंने आरोपों को गंभीरता से लिया और तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया। डीसीपी ट्रैफिक ने कहा, “चौराहे पर लग रहे अवैध स्टैंड को हटाने के लिए जल्द ही एक विशेष अभियान चलाया जाएगा।
मोहम्मद नईम की रिपोर्ट



















