श्री जैन श्वेताम्बर स्थानकवासी संघ के तत्वाधान में वर्षावास हेतु पधारे हुए मुनिराज राष्ट्रसंत शेर-ऐ-नेपाल सौरभ मुनि जी महाराज एवं युवा प्रेरक पूज्य गुरुदेव विज्ञान मुनि जी महाराज एवं उपप्रवर्तक पूज्य गुरूदेव सतीश मुनि जी मा० सा० एंव विशुद्ध रत्न सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में पूज्य गुरूदेव स्वामी प्रेमचन्द्र जी महाराज की 125वीं जन्म जंयती मनाई गई । इस अवसर पर नवकार महामंत्र का जाप, प्रभावशाली पैसठिया स्त्रोत का जाप किया गया।
सर्वप्रथम झण्डारोहण से कार्यक्रम प्रारम्भ किया, झण्डारोहण सुरेश जैन दिल्ली निवासी ने किया । स्वागत भजन चंदनबाला महिला मडल ने प्रस्तुत किया। समारोह अध्यक्ष दीपक मनसुख भाई कोठारी ने मुख्य अतिथि कृष्ण कुमार दीक्षित (कार्यालय प्रभारी भाजपा लखनऊ उ० प्र०) एवं सुरेश जैन का स्वागत किया।
इस अवसर पर राष्ट्रसंत सौरभमुनि ने बताया कि दादागुरूदेव स्वामी प्रेमचन्द्र का जन्म हिमाचल प्रान्त के दभौटा ग्राम में एक क्षत्रीय वंश में सन् 1900 में हुआ था। आपकी जैन, साधू साध्वियों के प्रति अटूट श्रद्धा थी इसलिए आपने जैन धर्म स्वीकार करते हुए दिनांक 01 नवम्बर 1914 को जैन संत की दीक्षा अंगीकार की। आपने अपने दीक्षा गुरु वृद्धिचन्द्र जी महाराज की कृपा से समाज सुधार का कार्य किया। आपकी प्रेरणा से हजारों व्यक्तियों ने कुव्यसनों मांसाहार को छोड़कर शाकाहार बने। आपके प्रवचनों को तत्कालिक अंग्रेज सरकार भी मान्यता देती थी ।
इस पावन प्रसंग के अवसर पर समाज के प्रबुद्ध एवं सेवा करने वालो का भी सम्मान किया। विशेष तौर पर सम्मान दौलत राम जैन, अशोक कुमार लोढ़ा, महावीर चन्द्र संखलेचा, अभय कुमार मेहता, सुरेश चन्द्र ओसवाल एवं 51 दिन तक गर्म पानी पर उपवास करने वाले शमशेर सिंह जैन एवं श्रीमती दीप्ति जैन धर्मपत्नी मनीष जैन ने 28वें उपवास का नियम लिया। अन्त में अध्यक्ष दिलीप शाह ने बाहर से आए अतिथिगण प्रबुद्ध और समाज के सभी श्रावक-श्राविकाओं को धन्यवाद दिया।
देवेश तिवारी की रिपोर्ट…



















