कानपुर नगर। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के पूर्व निदेशक और वर्तमान में भारतीय शर्करा एवं जैव-ऊर्जा संघ के सलाहकार प्रो. नरेंद्र मोहन को अल्कोहल उत्पादन करने वाली इकाइयों में अपशिष्ट जल के कुशलतापूर्वक उपचार हेतु नवीन तकनीक के विकास हेतु प्रतिष्ठित “अवंत गार्डे स्वर्ण पदक” से सम्मानित किया गया। इस प्रक्रिया में अपशिष्ट जल को इस तकनीक द्वारा शोधित करके प्रक्रिया मे पुनः प्रयोग करने से ताजे पानी की खपत कम हो सकेगी । यह पुरस्कार तिरुपति में आयोजित दक्षिण भारतीय गन्ना एवं शर्करा प्रौद्योगिकीविद् संघ के 53वें वार्षिक सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया।
दक्षिण भारतीय गन्ना एवं शर्करा प्रौद्योगिकीविद् एसोसिएशन के अध्यक्ष चिन्नप्पन ने प्रोफेसर मोहन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि कई अन्य उद्योगों की तरह, अल्कोहल उत्पादक इकाइयां भी अपनी ताजे पानी की आवश्यकता को कम करने का प्रयास कर रही हैं और विकसित प्रौद्योगिकी इस उद्योग को बड़े पैमाने पर मदद करेगी।
प्रो. मोहन ने बताया कि यह “मेम्ब्रेन बायो-रिएक्टर” पर आधारित यह तकनीक मेसर्स यूवाई ट्राइएनवायरो सिस्टम्स के साथ साझेदारी में विकसित की गई है और देश में 10,000 मिलियन लीटर अल्कोहल उत्पादन को देखते हुए, इससे लगभग 12 मिलियन मीट्रिक टन ताजे पानी की बचत होने की संभावना है।
प्रो. नरेंद्र मोहन “अवंत गार्डे स्वर्ण पदक” से सम्मानित


















