माइक्रोबायोलाजी विभाग, जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज कानपुर में, “एंटी माइक्रोबियल प्रतिरोध परियोजना (ए.एम.आर)” के अंतर्गत, प्राप्त निर्देशों के अनुसार दिनाक 18 नवम्बर 2025 से 24 नवम्बर 2025 तक, “रोगाणुरोधी प्रतिरोध (ए.एम.आर) जागरूकता सप्ताह”, का आयोजन गरिमापूर्ण रूप से किया जा रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबलू.एच.ओ.) द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित इस वैश्विक अभियान का उद्देश्य एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के विवेकपूर्ण एवं वैज्ञानिक उपयोग को प्रोत्साहित करना तथा तेजी से बढ़ रहे एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (ए.एम.आर) के प्रति समाज, स्वास्थ्यकर्मियों एवं छात्रों में गहन जागरूकता उत्पन्न करना है।
वर्ष 2025 की थीम:
“अभी कार्य करें – अपने वर्तमान की रक्षा करें, अपने भविष्य को सुरक्षित करें”
जो वर्तमान एवं भविष्य—दोनों की सुरक्षा हेतु तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
✦ 20 नवम्बर 2025 की प्रमुख गतिविधियाँ: ✦
दिनांक 20 नवम्बर 2025, बुधवार को माइक्रोबायोलाजी विभाग द्वारा पैरा एस-II एम.बी.बी.एस. छात्रों के सहयोग से Quiz Competition एवं शैक्षणिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
✦ एंटीबायोटिक जागरूकता के मुख्य उद्देश्य: ✦
✔ एंटीबायोटिक के जिम्मेदार और वैज्ञानिक उपयोग को प्रोत्साहित करना
डॉक्टर के परामर्श के बिना एंटीबायोटिक न लेने, उपचार को बीच में न रोकने एवं स्वयं-चिकित्सा से बचने का संदेश व्यापक रूप से प्रसारित किया गया।
✔ एंटीबायोटिक प्रतिरोध के बढ़ते खतरे को समझाना
छात्रों द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि बढ़ता हुआ प्रतिरोध भविष्य में सामान्य संक्रमणों को भी जटिल बना सकता है।
✔ एंटीमाइक्रोबियल स्टूअरडशिप के महत्व पर बल
स्वास्थ्यकर्मियों और छात्रों को दवा प्रबंधन के वैज्ञानिक सिद्धांतों को अपनाने का आग्रह किया गया।
✔ स्वच्छता एवं संक्रमण-नियंत्रण उपायों का प्रचार
हाथ स्वच्छता, सतह स्वच्छता व संक्रमण-नियंत्रण तकनीकों की नियमितता पर विशेष बल दिया गया।
✔ भविष्य की पीढ़ियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी
एंटीमाइक्रोबियल दवाओं की प्रभावशीलता को संरक्षित रखने हेतु समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
इस सप्ताह के अभियान के सफल ऑपरेशन का दायित्व,डॉ. मधु यादव आयोजन अध्यक्ष, डॉ. रजनी सिंह आयोजन सचिव, तथा डॉ. मनोज कुमार आयोजन सह सचिव, के नेतृत्व में किया जा रहा है l
इस आयोजन की उल्लेखनीय सफलता में डाॅ. (प्रोफेसर) विकास मिश्रा, डाॅ. सुरैया खानम अंसारी, डाॅ. रूचि गुप्ता, डाॅ. हिमांशी प्रकाश, डाॅ. मनोज माथुर, तथा डाॅ. दीप्ति मिश्रा का अविस्मरणीय सहयोग, सशक्त मार्गदर्शन, सक्रिय भागीदारी तथा आदर्श टीम-वर्क अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।



















