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“केसीएएस सीपीई स्टडी सर्कल का जीएसटी सेमिनार सम्पन्न, विशेषज्ञों ने एनुअल रिटर्न व ज्वलंत कर मुद्दों पर दिया मार्गदर्शन”

कानपुर। केसीएएस सीपीई स्टडी सर्कल, कानपुर द्वारा कैप्सूल रेस्तरां में “जीएसटी वार्षिक रिटर्न और जीएसटी से जुड़े अहम मुद्दे” विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में बड़ी संख्या में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और प्रोफेशनल्स ने भाग लिया।

सत्र का संचालन कन्वीनर सीए प्रशांत रस्तोगी ने किया, वहीं डिप्टी कन्वीनर सीए नितिन सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया और धन्यवाद ज्ञापन सीए शिवम सिंह ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीए धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने की। उन्होंने कहा कि जीएसटी अब परिपक्वता की ओर बढ़ रहा है लेकिन इसके साथ आने वाली चुनौतियों—एआई आधारित ऑडिट, रियल-टाइम स्क्रूटनी और वार्षिक रिटर्न की जटिलताओं—पर प्रोफेशनल्स और सरकार को मिलकर संवाद बढ़ाने की आवश्यकता है।

एनुअल रिटर्न की बारीकियों पर गहन चर्चा
सेमिनार के पहले सत्र में सीए हिमांशु सिंह ने GSTR-9 एवं GSTR-9C से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वार्षिक रिटर्न में संशोधन का विकल्प नहीं होने के कारण बेहद सावधानी के साथ फाइलिंग आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि FY 2024-25 के वे लेनदेन जो अगले वर्ष रिपोर्ट हुए हैं, उन्हें GSTR-9 की टेबल 10 व 11 में अनिवार्य रूप से दिखाना होगा। ITC संबंधित विवरणों को सही-सही टेबल 12, 13, 8C और 8H1 में दर्शाना जरूरी होगा।
इस वर्ष पहली बार लागू टेबल 6A1 को बड़ी राहत बताते हुए उन्होंने कहा कि FY 2023-24 की ITC, जो 2024-25 में क्लेम की गई है, उसे अलग से दर्शाने की सुविधा करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण सुधार है।
उन्होंने यह भी बताया कि GSTR-9 और GSTR-9C के विभिन्न टेबल अगर आपस में मेल नहीं खाते तो पोर्टल “Mismatch with GSTR-9” त्रुटि दिखाकर फॉर्म स्वीकार नहीं करता, इसलिए वार्षिक रिटर्न की तैयारी अत्यंत सतर्कता से करनी चाहिए।

जीएसटी के ज्वलंत मुद्दों और समाधान पर विशेषज्ञों की बेबाक राय
दूसरे सत्र में CIRC के सचिव एवं जीएसटी विशेषज्ञ सीए जयेंद्र कुमार तिवारी ने जीएसटी के ज्वलंत और व्यावहारिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि लगातार बदलते नियमों और अधिसूचनाओं के कारण छोटे व मध्यम व्यवसायियों पर अनुपालन का दबाव बढ़ा है।
कॉरपोरेट गारंटी, संबंधित पक्षों के लेन-देन, क्रॉस चार्ज और RCM से जुड़े मामलों की अस्पष्टता के कारण लाखों का कर दायित्व बन जाता है।
उन्होंने बताया कि सर्च, सीज़र और समन की प्रक्रिया में अनेक तकनीकी व प्रक्रियात्मक कमियां आम हैं, इसलिए किसी भी नोटिस का समय पर लिखित उत्तर देना और विशेषज्ञ सलाह लेना बेहद आवश्यक हो गया है।
GSTR-2B और 3B में अंतर, सिस्टम-जनरेटेड नोटिस और ऑटो-पॉपुलेटेड GSTR-9 की तकनीकी त्रुटियों पर भी उन्होंने विस्तृत दिशानिर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि “सही दस्तावेज़ीकरण, मासिक रिकन्सिलिएशन, नियमित ऑडिट और समय पर रिटर्न—यही जीएसटी के लंबी अवधि वाले विवादों से बचने का सबसे असरदार उपाय है।”
सेमिनार में सीए राजीव गुप्ता, सीए पुनीत अग्रवाल, सीए शीतांशु अवस्थी, सीए मलय गुप्ता, सीए विशाल खन्ना, सीए रमिंदर पाल, सीए शरद शुक्ला सहित कई प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स उपस्थित रहे।

देवेश तिवारी की रिपोर्ट

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