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हमसे का भूल हुई जो ये सजा हमका मिली

 

कोरोना काल में अपने जीवन को दांव पर लगा कर दूसरे के जीवन को बचाने वाले चिकित्सा विभाग से जुड़े कर्मचारियों के योगदान को कभी नहीं भुला जा सकता है। लेकिन वही दूसरी तरफ वही कर्मचारी जब 2 महीने से बगैर वेतन के अपने कार्य को कर रहे हैं। और उनके वेतन मिलने की भी कोई आशा ना हो तो फिर क्या हो। कुछ यही हाल राजकीय जे के कैंसर संस्थान के संविदा कर्मचारियों का है जो लगभग 34 संविदा कर्मचारी है। जिसके लिए आज उन्होंने निदेशक से भी बातचीत की। और उस बातचीत का भी कोई हल ना निकला। कर्मचारियों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया। सभी 34 कर्मचारियों से पहले ही लिखवा लिया गया है की उनको पहले का वेतन नहीं मिलेगा। और 15 दिन में समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन इस बात को दो महीने बीत गए हैं। निदेशक ने कहा कि दो चार हजार रुपए सभी कर्मचारियों को दिलवा दिया जाएंगे लेकिन आप लोग काम करें। अब सोचने की बात यह है कि अगर कर्मचारी हड़ताल करते हैं तो गंभीर बीमारी का इलाज करवा रहे मरीजों का क्या होगा। क्या मरीजों को भगवान भरोसे इस सरकार ने छोड़ दिया है। कर्मचारी और अस्पताल के बीच में मरीज उस तरह से पिस रहा है जैसे गेंहू और चक्की के बीच में घून पिसता है। जहां लगभग 20 दिन से बंद पड़ा सिकाई विभाग है जिसके लिए मरीज दरबदर भटक रहे हैं।

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