कानपुर के जाजमऊ के पुरानी चुंगी इलाके में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब घनी यूनिवर्सल टेनरी से धुएं का काला गुबार उठने लगा। करीब 50 वर्षों से चल रही मोहम्मद सारिक की इस टेनरी में चमड़े की फिनिशिंग का काम होता है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर यहाँ भारी लापरवाही बरती जा रही थी।
घटना रविवार दोपहर की है, जब टेनरी की दूसरी मंजिल पर स्थित स्प्रे डिपार्टमेंट में मजदूर काम कर रहे थे। अचानक हुए शॉर्ट सर्किट से वहां रखे केमिकल और चमड़े ने आग पकड़ ली। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि आसपास के इलाके में दहशत फैल गई।
स्थानीय बबलू के अनुसार आग लगने की सूचना तुरंत दी गई थी। थाना जाजमऊ पुलिस तो मुस्तैदी दिखाते हुए मात्र 10 मिनट में मौके पर पहुंच गई, लेकिन आग बुझाने वाली गाड़ियाँ नदारद रहीं।
बबलू ने बताया कि वह घर से निकला तो धुआं देखा। मौके पर पहुंचा तो आग लगी थी। सूचना के करीब 40 मिनट के बाद दमकल की तीन गाड़ियां पहुंचीं।
हैरानी की बात यह रही कि दमकल के पहुंचने से पहले ही टेनरी के कर्मचारियों ने लगभग 80 प्रतिशत आग पर काबू पा लिया था।
आग की विकरालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पास में बंधी गायें घबराकर बेकाबू हो गईं। एक तरफ आग की लपटें थीं और दूसरी तरफ जान बचाने को भागते मवेशी। इन बेकाबू गायों को संभालने और भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस के पसीने छूट गए।
इस आग ने फायर विभाग की पोल खोलकर रख दी है। यह टेनरी पिछले 50 वर्षों से संचालित है, लेकिन जांच में पता चला कि इसके पास न तो फायर डिपार्टमेंट की NOC है और न ही आग बुझाने के कोई पुख्ता इंतजाम। मौके पर पहुंचे फायर विभाग के एफएसओ (FSO) राहुल नन्दन से जब एनओसी न होने पर सवाल किया गया, तो वे गोलमोल जवाब देते नजर आए।
फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है। इस घटना में कितना नुकसान हुआ है, इसका आकलन अभी नहीं हो पाया है।
मोहम्मद नईम की रिपोर्ट


















