कानपुर। बृजेश क्षमा फाउंडेशन के तत्वावधान में रविवार को श्रीराम वाटिका, नौबस्ता, कानपुर नगर में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में शरणागति, सत्संग और परोपकार के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के मुख्य प्रवक्ता एवं आध्यात्मिक शिक्षक एस.बी.के. भईया ने कहा कि बिना सत्संग विवेक का विकास संभव नहीं है और हरि कृपा के बिना जीवन में वास्तविक शांति की अनुभूति नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि जीवन का वास्तविक धर्म दूसरों के लिए कष्ट सहन करना और त्याग की भावना अपनाना है। रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, विनोबा भावे, डॉ. राधाकृष्णन, लोकमान्य तिलक, गुरु नानक, कबीर और तुलसी जैसे महान संतों और विचारकों के आदर्शों को आत्मसात कर समाज सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।
एस.बी.के. भईया ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वही व्यक्ति सच्चा महात्मा है जिसका हृदय गरीबों और वंचितों के लिए संवेदनशील हो। उन्होंने यह भी कहा कि परोपकार से बढ़कर कोई उत्तम कर्म नहीं और दूसरों को कष्ट देना सबसे नीच कर्म है। निस्वार्थ भाव से जरूरतमंद की सहायता करने से आत्मिक संतुष्टि मिलती है और यही भावना मनुष्य को जन-जन के कल्याण की ओर प्रेरित करती है।
सत्संग में उन्होंने बताया कि प्रकृति सृष्टि की नियामक है और मनुष्य सबसे श्रेष्ठ प्राणी है, जिसे प्राप्त कर जीव मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकता है। राम नाम का स्मरण ही संसार सागर से पार लगाने का सरल माध्यम है, जिसका उल्लेख वेद और शास्त्रों में भी मिलता है।
कार्यक्रम में बृजेश तिवारी, पंकज तिवारी, हिमांशु ओमर, दशरथ प्रसाद, राजेन्द्र चौहान, धर्मेन्द्र भदौरिया, संतोष, गीता सिंह, जया मिश्रा, अरविन्द अग्निहोत्री, सुधाकर पाण्डे, पूनम द्विवेदी, बलराम यादव, श्याम, शुभम, अनीता पाण्डे, सीमा शुक्ला, रानी शर्मा, प्रतिमा द्विवेदी, स्वाती, ज्योति सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु व गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
देवेश तिवारी की रिपोर्ट


















