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2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने की मांग महिला शिक्षक संघ ने एमएलसी अरुण पाठक को सौंपा ज्ञापन

 

कानपुर। उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की अध्यक्ष रूचि त्रिवेदी के नेतृत्व में शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने साकेत नगर स्थित कैंप कार्यालय में सदस्य विधान परिषद (एमएलसी) अरुण पाठक से भेंट कर 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की बाध्यता से मुक्त किए जाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य (2025 INSC 1063) प्रकरण में 01 सितंबर 2025 को पारित निर्णय के भूतलक्षी प्रभाव से प्रदेश सहित देशभर के लाखों अनुभवी शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। जबकि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने टीईटी को जुलाई 2011 से अनिवार्य किया था और उससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों की अर्हताओं में टीईटी का कोई प्रावधान नहीं था।
महिला शिक्षक संघ ने कहा कि 25–30 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर दो वर्ष में परीक्षा उत्तीर्ण करने की बाध्यता मानसिक तनाव उत्पन्न कर रही है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। संघ ने मांग की कि केंद्र सरकार द्वारा संसदीय संशोधन के माध्यम से 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किया जाए।
एमएलसी अरुण पाठक ने शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उचित स्तर पर मामला उठाने और शासन तक मांग पहुंचाने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर अलका गुप्ता (उपाध्यक्ष), राशि पाठक (उपाध्यक्ष), समीक्षा तिवारी (जिला आय-व्यय निरीक्षक), निर्मला पाठक (ब्लॉक अध्यक्ष, भीतरगांव), रेणुका मिश्रा (सदस्य), डॉ. रुचि शुक्ला (ब्लॉक अध्यक्ष, शिवराजपुर) सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहीं।

देवेश तिवारी की रिपोर्ट

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