कानपुर में गरजा बुलडोजर, जाजमऊ में नाले पर बने घर-दुकानें जमींदोज, ठंड में खुले आसमान नीचे आए परिवार।
गरीबों के आशियानों पर चला नगर निगम का पंजा, रसूखदार टेनरी मालिकों को मिली अभयदान।
बिना नोटिस कार्रवाई का आरोप, अधिकारियों बोले बार-बार चेतावनी को किया गया अनसुना।
कानपुर के जोन-2 नगर निगम की टीम जब लाव-लश्कर और बुलडोजर के साथ जाजमऊ स्थित सरैया बाजार पहुंची, तो वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। नगर निगम ने नाले के कायाकल्प और जल निकासी में आ रही बाधा को दूर करने के लिए अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान नाले के ऊपर अवैध रूप से निर्मित 3 मकानों और 6 दुकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।
मकान टूटने के बाद प्रभावित परिवारों का दर्द छलक पड़ा। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम ने उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया। पीड़ितों ने बताया, भीषण ठंड का समय है और बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं। प्रशासन ने बिना किसी पूर्व लिखित नोटिस के अचानक बुलडोजर चला दिया। अगर हमें कुछ दिनों की मोहलत मिलती, तो हम रहने का कोई और इंतजाम कर लेते।
नगर निगम की टीम ने न केवल निर्माण तोड़े, बल्कि नाले के आसपास बने अन्य मकानों पर लाल निशान लगाते हुए 10 दिन का अल्टीमेटम भी दिया है।
वहीं, दूसरी ओर नगर निगम जोन-2 के जेई अंकित ने कार्रवाई को उचित ठहराया है। उनका कहना है कि यह नाला काफी पुराना है और कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे जलभराव की समस्या बनी रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिक्रमणकारियों को पहले ही कई बार नोटिस और मौखिक चेतावनी दी गई थी, लेकिन जब कब्जा नहीं हटाया गया, तब मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा।
क्षेत्रीय निवासी कामरान और अन्य लोगों ने इस कार्रवाई को भेदभावपूर्ण बताया है। उनका दावा है कि नगर निगम ने केवल गरीबों को निशाना बनाया है, जबकि इसी नाले के ऊपर कई बड़ी टेनरियों का अवैध कब्जा है। प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि प्रशासन का बुलडोजर उन रसूखदारों की इमारतों तक क्यों नहीं पहुंचा।
मोहम्मद नईम की रिपोर्ट



















