अपने लिए जिए तो वह इंसान है और जो दूसरों के लिए जिए तो वह भगवान है यह कहावत राजकीय जे के कैंसर संस्थान के संविदा कर्मचारियों ने सिद्ध करती है। जहां उनको 2 महीने से वेतन नहीं मिल रहा है लेकिन गंभीर बीमारियों का इलाज करा रहे मरीजों की जान को देखते हुए। उन्होंने मरीजो का इलाज करने का निर्णय लिया। और उन्होंने कहा कि मरीजों की जिंदगी को हम खतरे में नहीं डालेंगे हां अपना विरोध भी करेंगे लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से। जिसमें आज कर्मचारियो ने काली पट्टी बांधकर काम किया। वही अपनी पत्नी का इलाज करा रहे विश्वनाथ शर्मा ने कहा कि संविदा कर्मचारियों को उनका दो महीने का वेतन सरकार को देना चाहिए। और इनका टेंडर रिनिवल करना चाहिए। कोरोना महामारी के समय में जब अपनी जिंदगी बचाने के लिए हर आदमी घर में बैठा था। उस समय दूसरों की जान बचाने के लिए यह संविदा कर्मचारी अपनी जान हथेली पर रख गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे थे। अगर डॉक्टर को धरती का भगवान कहां जाता है तो इन्हें क्या कहेंगे। यह संविदा कर्मचारी भी भगवान से कम नहीं है। कोरोना महामारी में देश ने पीएम केयर फंड खूब दान दिया है। देश के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को भी देश की जनता ने आर्थिक आपदा से लड़ने के लिए आर्थिक सहायता की है। उसी आर्थिक सहायता फंड से संविदा कर्मचारियों का वेतन देना चाहिए। और संविदा कर्मचारियों का टेंडर रिनिवल करना चाहिए।
काली पट्टी बांधकर जताया विरोध, मानवता और इंसानियत के साथ संविदा कर्मचारी मरीजों का कर रहे हैं इलाज


















