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पण्डित मदन मोहन मालवीय और पण्डित अटल बिहारी की जयंती संगोष्ठी का आयोजन

 

कानपुर। भारत की राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं, जो सत्ता के शिखर पर पहुँचकर भी जनमानस से कभी दूर नहीं हुए। परमश्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेयी जी ऐसे ही विरल राजनेता थे,वे केवल प्रधानमंत्री नहीं थे, बल्कि विचार, संवाद और विकास की परंपरा के शिल्पकार थे। उक्त विचार सरसैया घाट स्थित कामता सेवा संस्थान के आध्यात्मिक सत्संग स्थल में आयोजित पण्डित मदन मोहन मालवीय और पण्डित अटल बिहारी की जयंती के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में संस्थान की प्रांतीय महामंत्री व भाजपा की वरिष्ठ नेत्री श्रीमती मंजू त्रिपाठी ने व्यक्त किए। सर्वप्रथम संगोष्ठी का शुभारंभ पण्डित मालवीय व श्रद्धेय अटल जी के तैलीय चित्र पर मल्यार्पण व पुष्प अर्पित करके हुआ। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए संस्थान के संस्थापक अनूप किशोर त्रिपाठी ने कहा कि अटल जी ने ऐसे समय में देश का नेतृत्व किया, जब भारत आत्मविश्वास की नई राह तलाश रहा था।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. नरेंद्र द्विवेदी ने कहा कि जनकवि अटल जी के शब्द आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। राष्ट्रप्रेम उग्रता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। उनका जीवन सिखाता है कि राजनीति सेवा का माध्यम हो, अहंकार का नहीं। संस्थान के प्रांतीय अध्यक्ष ओम नारायण त्रिपाठी ने कहा कि सहृदय अटल जी ने सुशासन, विकास और राष्ट्रीय स्वाभिमान की मजबूत नींव रखी। संगोष्ठी का संचालन डॉ हेमंत मोहन ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से अनुराग त्रिपाठी, किरन मिश्रा, प्रदीप मिश्रा, एडवोकेट निरंजन दीक्षित, बऊवा राठौर, बब्बन गुप्ता, कार्यालय प्रभारी मान सिंह, दुर्गा प्रसाद, अशोक त्रिपाठी, आर के पासवान, मंटू यादव, सुरेश गुप्ता, राज कुमार गुप्ता, जुगुल किशोर, सौरभ तिवारी, सीटू कश्यप उपस्थित रहे।

देवेश तिवारी की रिपोर्ट

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