कानपुर। यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड मेडिकल हॉस्पिटल (UISEMH), कानपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग (OBGYN) विभाग की ओर से ऑस्टियोपोरोसिस के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से BMD (बोन मिनरल डेंसिटी) जांच शिविर एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। शिविर में करीब 150 लोगों की जांच की गई, जिनमें से 120 प्रतिभागियों के विस्तृत BMD आंकड़े उपलब्ध रहे।
कार्यक्रम के दौरान ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम कारकों, बचाव, हड्डियों के स्वास्थ्य और समय पर जांच के महत्व को लेकर जागरूकता व्याख्यान आयोजित किया गया। ऑर्थोपेडिक विभाग के डॉ. प्रग्नेश ने हड्डियों के स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। वहीं OBGYN विभाग की डॉ. प्रतिमा वर्मा और डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने महिलाओं, विशेषकर रजोनिवृत्ति के बाद ऑस्टियोपोरोसिस के बढ़ते जोखिम और इससे बचाव के उपायों के बारे में बताया।
कार्यक्रम का आयोजन विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा द्विवेदी के निर्देशन एवं पर्यवेक्षण में किया गया। कार्यक्रम के समन्वय में डॉ. फरहीन सिद्दीकी और डॉ. प्रीति सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जांच में 62.5 प्रतिशत प्रतिभागियों में ऑस्टियोपीनिया
120 प्रतिभागियों के BMD आंकड़ों के अनुसार 38 लोगों की BMD सामान्य पाई गई, जबकि 75 प्रतिभागियों में ऑस्टियोपीनिया और 7 में ऑस्टियोपोरोसिस पाया गया। आंकड़ों के अनुसार 31.7 प्रतिशत प्रतिभागियों की BMD सामान्य, 62.5 प्रतिशत में ऑस्टियोपीनिया और 5.8 प्रतिशत में ऑस्टियोपोरोसिस पाया गया।
जांच में 40 से 49 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभागियों की संख्या सबसे अधिक 40 रही। पूरे समूह का औसत T-score लगभग -1.19 रहा। जांच में ऑस्टियोपीनिया के मामले अधिक पाए जाने पर विशेषज्ञों ने समय रहते हड्डियों की जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह लेने के महत्व पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान भारत से संबंधित उपलब्ध शोध आंकड़ों की भी जानकारी दी गई। भारतीय रजोनिवृत्त महिलाओं पर किए गए एक व्यवस्थित समीक्षा एवं मेटा-विश्लेषण में काठ की रीढ़ (लम्बर स्पाइन) में ऑस्टियोपोरोसिस की संयुक्त व्यापकता लगभग 29 प्रतिशत और ऑस्टियोपीनिया की व्यापकता लगभग 37 प्रतिशत बताई गई है। वहीं, एक भारतीय स्वस्थ प्रतीत होने वाली आबादी पर किए गए अध्ययन में ऑस्टियोपोरोसिस की व्यापकता 6.9 प्रतिशत और ऑस्टियोपीनिया की व्यापकता 34 प्रतिशत पाई गई। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोपीनिया की व्यापकता अलग-अलग आबादी और अध्ययन समूहों के अनुसार भिन्न हो सकती है।
क्या है ऑस्टियोपीनिया और ऑस्टियोपोरोसिस?
ऑस्टियोपीनिया में हड्डियों की मजबूती सामान्य से कुछ कम हो जाती है। यह आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम से जुड़ी स्थिति हो सकती है।
ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं, जिससे मामूली चोट या गिरने पर भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती उम्र, रजोनिवृत्ति के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव, परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस या फ्रैक्चर का इतिहास, कम वजन, कैल्शियम एवं विटामिन-D की कमी, शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान, अधिक शराब का सेवन तथा लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
कार्यक्रम में लोगों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने, पर्याप्त कैल्शियम और प्रोटीन का सेवन करने, विटामिन-D का उचित स्तर बनाए रखने तथा नियमित शारीरिक गतिविधि और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम करने की सलाह दी गई। बुजुर्गों में गिरने से बचाव के उपायों पर भी विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को हड्डियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना तथा समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली और उचित चिकित्सकीय सलाह के माध्यम से ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करने के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम में विभाग के संकाय सदस्यों में डॉ. नीना गुप्ता, डॉ. शैली अग्रवाल, डॉ. पाविका लाल, डॉ. दिव्या द्विवेदी एवं डॉ. सीमा निगम सहित समस्त सिस्टर, जूनियर रेजिडेंट्स एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
देवेश तिवारी की रिपोर्ट


















